आमार जीवन सदा पापे रत नहीं कोई पुण्य लेश अन्यों को उद्वेग दिया अनंत, दिया जीवों को क्लेश। निजसुख हेतु पाप से नहीं डर दयाहीन मैं स्वार्थपर पर सुखे दुखी सदा मिथयाभाषी परदुख ...
भक्त नामावली भक्त नामावली श्री हरिवंश नाम ध्रुव कहत ही , बाढ़े आनन्द बेलि । प्रेम रँग उर जगमगे, जुगल नवल रस केलि ।।1।। निगम ब्रह्म परसत नहीं, जो रस सब तें दूरि। कियो प्रकट हरिव...
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