7

*रथ यात्रा 6*

    जैसे कल हम सब ने सुना भक्त उद्यान में महाप्रभु जी को  ले जाते हैं।कैसे राजा प्रताप रुद्र पर कृपा होती है,अब फिर से रथ चलता है महाप्रभु बहुत आनंदित हो रथ खींचते है ,बहुत विभोर हो रहे हैं क्युंकि वो जानते है आज श्री जगन्नाथ जी वृन्दावन आ रहे हैं। यानी गुण्डिचा मन्दिर,,वो भी 100 साल बाद ।

    आज तो महाप्रभु जी की खुशी का कोई ठिकाना नही रहा क्युंकि आज रथ गुण्डिचा मन्दिर आ गया यानी मेरे प्रभु आज वृन्दावन आ गये हैं,तो आज मन्दिर के बाहर रथ खड़ा हो गया,जगन्नाथ जी के श्री विग्रह रथ से नीचे ले कर आ रहे हैं,ज्यों  ही जगन्नाथ जी का विग्रह नीचे उतरे त्यों ही महाप्रभु ने जगन्नाथ जी को आलिंगन कर लिया ।

      आज भी रथ जब गुण्डिचा मन्दिर आता है  तो भक्त जन की भीड़ कम हो जाती ही ,  भक्त जब दर्शन कर वापिस चले जाते हैं,तो जगन्नाथ जी अकेले ही होते हैं। तब तो इतनी छुट है की जगन्नाथ जी को तो कोई भी  भक्त गले तक लगा लेते है । महाप्रभु जी ने भी जगन्नाथ जी को गले लगा लिया ,और उन्मत नृत्य करते हैं। अपने भक्त जनों के साथ,इस समय भाव क्या है ,भाव ये है की ये सब गोपियां हैं ,तो गोपियों के साथ नृत्य करते है। कभी गोले के आकार मे घूमते हैं,कभी  गोपियों के साथ ठुमका लगा लगा नाच रहे हैं,अरे देख ना ललिते क्या शोभा लग रही है मेरे प्रियतम की ,देख ना देख कैसे मेरे प्रभु मुस्कुरा रहे हैं,अब तो खूब भोग लगाते हैं, हर रोज जगन्नाथ जी को ।

   अब 7,8 दिन जब तक जगन्नाथ जी गुण्डिचा विराजते है।महाप्रभु जी को एक भी आंसू नही आता ,भक्तों को महाप्रभु को ऐसे खुश देख  बहुत आनन्द मिल रहा है ।अब तो 4-5 दिन हो गए जगन्नाथ जी को गुण्डिचा मन्दिर। तो अब जगन्नाथ मन्दिर के प्रांगण मे ही तो  जो लक्षमी जी का मन्दिर है,अब वहा मन्दिर में से लक्षमी जी की डोली गुण्डिचा मन्दिर आती है ,पण्डा पुजारी डोली उठा कर लक्षमी  जी को  मन्दिर ले कर आते है ,भाव ये है की लक्षमी जी जगन्नाथ जी से नाराज़ हो कर उन को बुलाने आती है ,अरे प्रभु अब चलो वापिस आप मन्दिर से कब से  गये हो आप तो मन्दिर सूना कर गये ।आप के  बिना तो मन्दिर खाली हो गया,अब चलो वापिस ,पहले तो उस डोली को रोक लिया जाता है गुण्डिचा के बाहर ही,फिर लक्ष्मी जी नाराज़ हो जाती है लक्ष्मी जी के पण्डय जगन्नाथ जी के रथ को गुस्से से नुक्सान पहुंचाते है,रथ  का पहिया तोड देते है ,फिर लक्ष्मी जी नाराज़ ही कर  वापिस चली जाती है ,और कुछ दिन और जगन्नाथ जी गुण्डिचा में रहते हैं।

 ( दास मानव )

Comments

Popular posts from this blog

शुद्ध भक्त चरण रेणु

श्री शिक्षा अष्टकम

श्री राधा 1008 नाम माला