राधा रानी की दासी

*'मैं राधारानी की दासी हूँ' यदि यह विश्वास मन में दृढ़ न हो, तो कातर भाव से निताइ-गौराङ्ग के निकट प्रार्थना करो प्रभु, मैं कलिहत जीव हूँ; मायामुग्ध हो संसार-सागर में आ गिरा हूँ।आप करुणामय हैं, करुणाकर इस बन्धन से मुक्त कीजिये। हे प्रभु, आपकी कृपा के अतिरिक्त मुझ जैसे पाखण्डी के उद्धार का और कोई साधन नहीं।' इसप्रकार का भाव रखो और 'हा निताइ गौराङ्ग !' कहकर रोओ; हृदय निर्मल हो जायगा।'*

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