राधेरानी के आभूषण

*श्रीराधारानी के आभूषण भी कृष्ण कृष्ण कहते हैं* 💫💫🎶🌿🌹

महाभाव स्वरूपिणी श्रीराधा का सबकुछ महाभाव स्वरूप है।वो महभाव ही धारण करती है।

केवल भाव ही भावमयी के अंग चढ़ सकता है

उनके वस्त्र,उनके आभूषण,उनकी पुष्पमाला,केशों पर लगे पुष्पगुच्छ उनके स्पर्श से सब महभाव स्वरूप हो जाते है

महभाव क्या है?कृष्ण प्रेम की सर्वोच्च अवस्था

राधारानी का मन,उनका रोम रोम सर्वदा कृष्ण कृष्ण करता है

मन तो क्या वस्त्र आभूषण भी कृष्ण कृष्ण कहते हैं

एकबार राधारानी अपने आंगन में यहां से वहां डोल रही थी

उनके नूपुर रुनु झुनू रुनु झुनू बज रहे थे
राधारानी को उनमे कृष्ण कृष्ण कृष्ण! सुनाई दे रहा था

बड़ा आनंद था वो जानबूझकर नूपुर झंकृत कर यहां वहां डोलती हुई कृष्ण कृष्ण सुन रही थी

तभी कृष्ण आए।स्वामिनी की ऐसी भाव अवस्था देखकर श्याम सुंदर पसीना पसीना हो गए(स्वेद सात्विक विकार)

श्रीराधारानी ने जैसे ही देखा श्याम सुंदर आए हैं,पसीने से भीगे हैं।हाय!धूप में आए हैं श्रांत होंगे

राधारानी नूपुरों की आवाज़ भूल गई।दौड़ी श्याम सुंदर की ओर

हाथ पकड़कर निकट बिठाया और अपने अंचल से उनका पसीना पोछ दिया

श्याम सुंदर उनकी ओर अवाक होकर देखते रहे।उनके श्याम अंगों की नीली आभा राधारानी तड़ित-सुवर्ण-चंपा वर्ण अंग पर पड़ रही थी

【 *तड़ित-सुवर्ण चंपा वर्ण*- शिवजी श्रीराधाकृपा कटाक्ष स्तवराज में देवी पार्वती से कहते हैं कि राधारानी अंग कांति सुवर्णमय बिजली की भांति है।फिर उन्हें लगता है नही नही एक उपमा पर्याप्त नही-वो सुवर्ण चंपा सी हैं।

*Most imp*-जब श्रीराधा आदि की किसी पुष्प आदि से तुलना की जाती है,तो वो पुष्प भी भौतिक जगत का नही,आध्यात्मिक जगत का चैतन्यमयी पुष्प ही होता है

किसी दोषयुक्त त्रिगुणात्मक वस्तु से अतुल्या राधारानी की तुलना की भी नही जा सकती

ऐसी युगल जोड़ी को दूर खड़ीं सखियाँ मंजरियां देख रही थीं और बलि बलि जा रहीं थीं🙇🏻

जय जय श्रीश्री राधे श्याम🙏🏼🙇🏻🌹

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